भारत सरकार ने China को एक बड़ा झटका देते हुए आयतित टाइटैनियम डाइऑक्साइड पर एंटी डंपिंग ड्यूटू लगाई

नई दिल्ली

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव (India-Pakistan Tension) कम हो गया है और सीमा पर सीजफायर लागू है. एक ओर जहां अमेरिका की ओर से Indo-PAK Ceasefire का ऐलान बीते शनिवार को किया गया था, तो उसी दिन चीन पाकिस्तान को उकसाते हुए नजर आया था. अब सीजफायर के बाद भारत ने China को तगड़ा झटका दिया है, जिसका असर 5 साल तक ड्रैगन पर देखने को मिलेगा. आइए जानते हैं भारत सरकार ने ऐसा क्या फैसला लिया है?

5 साल के लिए लगाई एंटी डंपिंग ड्यूटी  
India-Pakistan के बीच सीजफायर के ऐलान के बाद भारत सरकार ने चीन को निशाने पर लिया है और उस पर नया टैरिफ बम फोड़ा है. जी हां, चीन से आयातित टाइटेनियम डाइऑक्साइड (Titanium Dioxide) पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगा दी है और ये अगले पांच साल के लिए लगाई गई है. वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने 460 डॉलर-681 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के बीच एंटी डंपिंग ड्यूटी को नोटिफाई किया है.

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क्यों लिया भारत सरकार ने फैसला?
अब सवाल कि भारत और पाकिस्तान सीमा पर तनाव के बाद सीजफायर और चीन का पाकिस्तान को उकसाने के बीच भारत सरकार (Indian Govt) ने आखिर ड्रैगन को लेकर ये फैसला क्यों लिया. तो बता दें कि भारत के डीजीटीआर (DGTR) यानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज ने ये पाया कि चीन बहुत कम कीमतों पर टाइटेनियम डाइऑक्साइड देश में डंप कर रहा है, जिससे घरेलू उद्योग को नुकसान हो रहा है और इसीके मद्देनजर ये एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला लिया गया है.

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इन सेक्टर्स पर दिखेगा असर
यहां बता दें कि टाइटेनियम डाइऑक्साइड (Titanium Dioxide) का इस्तेमाल तमाम सेक्टर्स में किया जाता है. इनमें पेंट, प्लास्टिक, कागज, खाद्य उद्योग शामिल हैं. ऐसे में इनसे जुड़ी भारतीय कंपनियों पर सरकार के इस फैसले का असर देखने को मिलेगा. खासतौर पर पेंट्स कारोबार से जुड़ी भारतीय कंपनियों Asian Paints, Berger Paints, Shalimar Paints समेत अन्य आने वाले दिनों में फोकस में रहेंगी.

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US के साथ China की बनी बात!
उधर दूसरी ओर ग्लोबल ट्रेड वॉर का मु
द्दा बने अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले हैं. दरअसर, US-China ट्रेड डेफिसिट को कम करने को  लेकर जेनेवा में डील फाइनल हो गई है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, उन्होंने चीन के साथ दो दिवसीय बैठकों के बाद एक समझौता किया है, जिससे अमेरिका को अपना 1.2 ट्रिलियन डॉलर व्यापार घाटा कम करने में मदद मिलेगी. हालांकि, ये खुलासा नहीं किया कि कैसे अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट कम होगा और न ही उन्होंने टैरिफ कटौती पर स्पष्ट ऐलान नहीं किया है.

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